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कल्पना कितनी निश्छल होती है कभी सोच के देखो। कल्पना का सुख भोग के देखो। कहतें हैं सपने सबसे सुखदाई होते हैं लेकिन उसमे भी कुछ बुरे मिल जाते हैं लेकिन कल्पना उस बीज की तरह है जिसे आप ख़ुद बोते हो ख़ुद काटते हो। कल्पना की अभिव्यक्ति आगे दूंगा।
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